छत गिरने का खतरा अचानक आता है। पहले कुछ सेकंड में सही कदम लेना जिंदगी बचा सकता है। नीचे दिए हुए निर्देश सरल हैं — भूलें नहीं और अपने परिवार के साथ साझा करें।
अगर आप या कोई पास में है और छत गिरती है तो सबसे पहले खुद को और दूसरों को हटाइए। हल्की-सी कंपन या आवाज सुनते ही बाहर या खुले स्थान पर जाने की कोशिश करें।
घटनास्थल पर फँसे हुए लोगों के लिए शोर कर के मदद बुलाइए और आसपास के लोगों को घटना की जानकारी दीजिए।
अगर कोई दबा हुआ है तो उसे अकेले जोर से नहीं खींचें। भारी चोट लगी हो सकती है। आपातकालीन सेवाओं (112/108) को तुरंत कॉल करें और स्थिति का सटीक पता बताइए।
रक्तस्राव हो तो साफ कपड़ा या बैंडेज से दबाव दें, पर किसी भारी आंतरिक चोट की आशंका हो तो घायल को हिलाएँ नहीं। साँस बंद हो तो CPR की बेसिक तकनीक शुरू की जा सकती है — पर पहले आसपास से प्रशिक्षित व्यक्ति को बुलाइए।
गैस, बिजली के मीटर या लिक्विड सिलिंडर को खतरे में देखकर तुरंत मुख्य स्विच बंद करें, पर ज्वलनशील माहौल में अकेले अंदर जाकर जोखिम न लें।
एक बार सुरक्षा सुनिश्चित हो जाए तो पुलिस और रेस्क्यू टीम को सूचित करें। घटना का फोटोज लें यदि सुरक्षित हो। यह बीमा और कानूनी कामों में काम आएगा।
फरार न हों — भवन मालिक, मकान किराये पर देने वाला या बिल्डर को भी लिखित में घटना की सूचना दें। स्थानीय नगर निगम या पालिका को घटना रिपोर्ट कराना जरूरी होता है।
चोटिलों को डॉक्टर से दिखाइए और सरकारी अस्पताल में मेडिकल रिकॉर्ड बनवाइए। चोट और इलाज का दस्तावेज़ीकरण बीमा दावा के लिए जरूरी है।
रोकथाम पर काम करने के लिए पहले कमजोरी के संकेत पहचानें: छत का झुकना, दीवारों में दरारें, लगातार पानी का रिसाव, मकान में असामान्य आवाजें। भारी सामान छत पर न रखें और पुराने बिल्डिंग में विशेषज्ञ से सालाना जाँच करवाएँ।
निर्माण में गुणवत्ता पर ध्यान दें — डाउनपाइप, ड्रेनेज क्लियर रहें और छत पर अतिरिक्त लोड (टैंक, गोदाम) सही तरीके से बांधे हों। भूकंप या भारी बारिश के बाद भी तुरंत निरीक्षण कराइए।
बीमा लेकर रखें — भवन और पर्सनल इन्श्योरेंस में प्राकृतिक और मानवजनित नुकसान को कवर कराना भविष्य की आर्थिक हानि कम करता है।
एक इमरजेंसी किट रखें: टार्च, रेडियो, पानी, प्राथमिक चिकित्सा किट, मونوब्लॉक, और जरूरी दवाइयां। परिवार में एक मीटिंग पॉइंट तय करें और बच्चों को सुरक्षा नियम सिखाएं।
छत गिरने जैसी घटनाएं भयावह होती हैं, पर तैयारी और त्वरित कार्रवाई से नुकसान कम किया जा सकता है। सरल निरीक्षण और सावधानी अक्सर बड़े हादसों से बचाती है।
दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 की छत भारी बारिश के बाद 28 जून को गिर गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। इस घटना ने देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट की संरचना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने अन्य एयरपोर्ट्स के निरीक्षण की बात कही ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।