नाबालिग आरोपी: आपके अधिकार और पहला कदम क्या हों

अगर आपका बच्चा नाबालिग आरोपी बन गया है तो घबराना फायदेमंद नहीं। सही जानकारी और तेज़ कदम सबसे ज़रूरी हैं। यहां स्पष्ट तरीके से बताता हूँ कि क्या करना चाहिए, कौन‑कौन से अधिकार हैं और कैसे बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

नाबालिग की परिभाषा और अधिकार

नाबालिग यानी जो उम्र 18 साल से कम है। कानून का मकसद सज़ा नहीं बल्कि पुनर्वास और सुरक्षा है। बच्चे को कई अधिकार मिलते हैं: कानूनी सहायता (मुफ़्त भी मिल सकती है), परिवार को सूचित करने का अधिकार, वयस्कों के साथ अलग रखे जाने का अधिकार और किसी भी बयान पर दिक्सूचना से पहले वकील मौजूद रहने का हक। मीडिया द्वारा पहचान उजागर करने पर भी रोक होती है—बच्चे की पहचान छुपाई जाती है।

पुलिस गिरफ्त में भी नियम अलग हैं: नाबालिग को वयस्क थाने के लॉकअप में नहीं रखा जाता और उसे जल्द‑से‑जल्द जुवेनाइल बोर्ड के समक्ष पेश किया जाना चाहिए। सामान्यतः यह प्रस्तुति 24 घंटे के भीतर होती है, ताकि किसी भी गलत व्यवहार से बचाव हो सके।

तुरंत क्या करें — माता‑पिता और अभिभावकों के लिए कदम

1) शांत रहें और जानकारी इकट्ठा करें: किस आरोप से जुड़ा मामला है, घटना कब और कहाँ हुई, और पुलिस ने क्या कहा।
2) वकील तुरंत बुलाएँ: जुवेनाइल मामलों का अनुभव रखने वाला वकील चुनें। अगर वे नहीं मिलते तो सरकारी मुफ्त विधिक सहायता लें।
3) किसी भी दस्तावेज़ या बयान पर वकील के बिना हस्ताक्षर न कराएँ।
4) पुलिस को परिवार की जानकारी दें और लिखित में मांगे कि बच्चे को किस स्थिति में रखा गया है।
5) सोशल मीडिया पर मामले की चर्चा न करें—पहचान उजागर होने और प्रभावित होने का जोखिम रहता है।

इसके अलावा बच्चे की मानसिक स्थिति का ध्यान रखें। भय, शर्म या तनाव से बच्चे को समर्थन की जरूरत होगी—स्कूल सलाहकार या मनोवैज्ञानिक से संपर्क उपयोगी होता है।

कानूनी प्रक्रिया में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) अहम होता है। बोर्ड मामले की जांच और जरूरत के अनुसार मनोवैज्ञानिक या सामाजिक मूल्यांकन करवा सकता है। गंभीर मामलों में आयु‑अनुमान और पुनर्वास योजनाओं पर निर्णय लिया जाता है। याद रखें, बुनियादी उद्देश्य सुधार और लौटाना है, न कि सजा देना जैसा वयस्क मामलों में होता है।

अगर आप चिंतित हैं कि बच्चे की शिक्षा या भविष्य प्रभावित होगा — ऐसे मामलों में स्कूल को सूचित करें पर संवेदनशीलता बनवाए रखें। कानूनी सलाह के साथ स्कूल‑काउंसलिंग और सामाजिक कार्यकर्ता से मिलकर हल निकाला जा सकता है।

आखिर में, जल्दी और सही कदम ही फर्क बनाते हैं: वकील से बात करें, पुलिस‑कागजात का रिकॉर्ड रखें, बच्चे को मानसिक सहारा दें और मीडिया या सोशल पोस्ट से बचें। आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय NGO या मुफ्त कानूनी सहायता से भी संपर्क करें—कई बार यही छोटी मदद बड़ी बाधा हटाती है।

पुणे कार दुर्घटना: नाबालिग के पिता पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप
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पुणे कार दुर्घटना: नाबालिग के पिता पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप

पुणे कार दुर्घटना मामले में नाबालिग आरोपी के पिता पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। दो 24 वर्षीय इंजीनियरों की मौत की दुर्घटना में पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर यरवडा जेल भेज दिया है। मामले में अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया है।

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