क्या आपने कभी सोचा है कि अलग-अलग क्षेत्र या देशों के बिजली दाम अचानक बराबर क्यों दिखते हैं? यही काम मार्केट कपलिंग करता है। आम भाषा में, यह उन बाजारों को जोड़ने का तरीका है जहाँ प्राइसिंग और ट्रेडिंग को एक साथ मिलाकर अधिक कुशल परिणाम हासिल किए जाते हैं।
सरल शब्दों में, मार्केट कपलिंग में दो या अधिक बाजारों के ऑर्डर और क्षमता (जैसे ट्रांसमिशन लाइन की उपलब्धता) को साथ में देखा जाता है। दिन‑आगे या रीयल‑टाइम ऑर्डर मिलाए जाते हैं ताकि कुल सिस्टम लागत कम हो और बिजली सबसे सस्ती जगह से बह सके।
प्रक्रिया में आम तौर पर ये कदम होते हैं: पहले हर क्षेत्र की मांग और आपूर्ति का अनुमान, फिर ट्रांसमिशन सीमा के अनुसार ऑर्डर मैक्सिमाइज़/मिनिमाइज़ करना, और आख़िर में एक कॉमन प्राइस निकालना। इससे परिमाण रूप में कीमतों का संतुलन आता है और अनावश्यक कंजेशन घटता है।
यदि आप निवेशक हैं तो ध्यान रखें: मार्केट कपलिंग उतार‑चढ़ाव घटा सकता है, लेकिन साथ में इससे कुछ कंपनियों की आमदनी प्रभावित होगी। उदाहरण के लिए, जिन पावर कंपनियों के पास क्षेत्रीय लाभ था, उन्हें अब प्रतिस्पर्धा बढ़ने से मार पड़ सकती है। वहीं, ट्रेडिंग हाउसेस और पावर एक्सचेंज के लिए नए अवसर बन सकते हैं।
उपभोक्ता के तौर पर फायदा साफ़ है — लंबी अवधि में कीमतों की अस्थिरता कम हो सकती है और पावर सप्लाई अधिक भरोसेमंद बनेगी। पर ध्यान दें: ट्रांसमिशन क्षमता, नीतियाँ और मांग में अचानक बदलाव कीमतों को फिर भी प्रभावित कर सकते हैं।
जो लोग रोज़ाना बाजार की खबर देखते हैं, उनके लिए व्यवहारिक टिप्स ये हैं: पावर एक्सचेंज (IEX/अन्य) के डे‑अहेड प्राइस देखें, ट्रांसमिशन कन्शेशन रिपोर्ट्स पर नजर रखें, और नियामक आदेश (जैसे CERC/State regulators) की खबरें फॉलो करें। ये संकेत आपको बताएंगे कब प्राइस मूव हो सकते हैं।
जो निवेश रणनीति आज फिट बैठती है, वह कल बदल सकती है। इसलिए पोर्टफोलियो में जोखिम और सेक्टर‑वैरिएशन रखें। पावर स्टॉक्स में निवेश से पहले कंपनी की पावर सेलिंग रणनीति, पावर पोजिशन और ट्रेडिंग एक्सपोज़र देखें।
अंत में, मार्केट कपलिंग तकनीकी भी है और नीतिगत भी। इसे समझना जितना तार्किक है, उतना ही व्यावहारिक भी — खासकर उन लोगों के लिए जो ऊर्जा, ट्रेडिंग या पावर‑रिलेटेड निवेश में हैं। यहां से आप संबंधित खबरों और रिपोर्ट्स पर टिककर जल्दी निर्णय ले सकते हैं।
भारतीय ऊर्जा विनिमय लिमिटेड (IEX) के शेयरों में 24 सितंबर, 2024 को 12% से अधिक की भारी गिरावट देखी गई। खबर है कि सरकार ऊर्जा विनिमय के लिए मार्केट कपलिंग पर विचार कर रही है, जो IEX की बाजार हिस्सेदारी और प्रमुखता को चुनौती दे सकती है। IEX फिलहाल 84% बाजार हिस्सेदारी के साथ इस क्षेत्र में सबसे अधिक भरोसेमंद प्लेटफार्म है।