F&O ट्रेडिंग यानी फ्यूचर्स और ऑप्शन्स — ये स्टॉक्स और इंडेक्स पर लीवरेज देने वाले कंट्रैक्ट हैं। एक तरफ यही तेज़ प़्रॉफिट का रास्ता खोलते हैं, दूसरी तरफ नुकसान भी बड़ा हो सकता है। अगर आप छोटी पूँजी से ज्यादा एक्सपोज़र लेना चाहते हैं, तो F&O काम आता है, पर नियम समझना जरूरी है।
फ्यूचर्स: एक कन्ट्रैक्ट जो भविष्य में किसी तारीख (expiry) पर निर्धारित कीमत पर स्टॉक/इंडेक्स खरीदने या बेचने का वायदा करता है। आप खरीद सकते हैं (लंबी/Long) या बेच सकते हैं (शॉर्ट/Short)।
ऑप्शन्स: अधिकार देते हैं लेकिन ज़रूरी नहीं करते। कॉल ऑप्शन खरीदने से आपको खरीदने का अधिकार मिलता है, पुट ऑप्शन से बेचने का। ऑप्शन्स प्रीमियम के रूप में महंगे या सस्ते होते हैं—इम्प्लायड वोलैटिलिटी (IV) इनके दाम तय करती है।
लॉट साइज और एक्सपायरी: NSE पर हर स्टॉक/इंडेक्स का लॉट साइज अलग होता है और एक्सपायरी वीकली या मंथली होती है। ट्रेड शुरू करने से पहले लॉट साइज, मार्जिन और एक्सपायरी की जाँच करें।
1) पोजिशन साइज: किसी भी ट्रेड में कुल पोर्टफोलियो का 1-2% से ज्यादा रिस्क न लें। लीवरेज बड़ा है, इसलिए पोजिशन छोटी रखें।
2) स्टॉप-लॉस लगाएँ: F&O में स्टॉप-लॉस बिना बहाना नहीं—कठोर स्टॉप रखें और ट्रेडिंग प्लान के बाहर निर्णय न लें।
3) ओपन इंट्रेस्ट (OI) और वॉल्यूम देखें: OI बढ़ना बताता है कि ट्रेंड मजबूत हो सकता है; OI घटना यानी पोजिशन क्लोज हो रहे हैं। वॉल्यूम और प्राइस मूवमेंट साथ देखें।
4) इम्प्लायड वोलैटिलिटी (IV): ऑप्शन प्रीमियम IV पर निर्भर करता है। IV ज़्यादा होने पर ऑप्शन महंगे होंगे—बिक्री से सावधान रहें जब IV ऊँचा हो।
5) एक्सपायरी के दिन संभलकर ट्रेड करें: एक्सपायरी डेट पर प्राइस तेजी से बदल सकती है—ट्रेड्स रोल करने या क्लोज करने की योजना रखें।
6) हेजिंग का उपयोग करें: अगर आपके पास स्पॉट में होल्डिंग है तो ऑप्शन्स से हेज कर सकते हैं—उदाहरण के लिए, लंबी स्टॉक होल्डिंग के खिलाफ पुट खरीदना।
7) अमात्य गलतियाँ बचें: ओवरट्रेडिंग, बिना स्टॉप के रखना, और सूट-ऑफ-हैज़र्ड टिप्स पर भरोसा करना—ये आम गलतियाँ हैं।
शुरुआत कैसे करें: पहले डेमो या छोटे अकाउंट से ट्रेड करें। अपने ब्रोकरेज के मार्जिन नियम समझें। चार्ट, OI, IV और न्यूज़ पर रोज़ निगाह रखें। किसी भी नए स्ट्रैटेजी को पहले पेपर ट्रेड पर आज़माएँ।
F&O में पैसा बनाने का तरीका और भी है — पर अनुशासन, सरल नियम और लगातार सीखना ज्यादा जरूरी है। छोटे-छोटे नियम अपनाएँ और फिर धीरे-धीरे स्केल बढ़ाएँ। याद रखें: जीत का राज़ अच्छी रिस्क मैनेजमेंट में छिपा होता है।
बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने चिंता जताई है कि SEBI के F&O ट्रेडिंग पर नियंत्रण के उपाय बाजार को उथला बना सकते हैं और 'डब्बा' ट्रेडिंग की वापसी कर सकते हैं। उनका मानना है कि इससे सच्चे हेजिंग महंगे और जटिल हो जाएंगे, जिससे छोटे ट्रेडर कैश स्टॉक्स और पेनी स्टॉक्स की ओर रुख करेंगे। SEBI के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वे वर्तमान में इक्विटी कैश मार्केट में इंट्राडे ट्रेडिंग को नियंत्रित करने की योजना नहीं बना रहे हैं।