दिवाली खुशी का त्योहार है, पर पटाखों और जलते कचरे से हवा बहुत गंदी हो जाती है। घर वालों की सेहत और शहर की हवा दोनों प्रभावित होते हैं। अगर आप इस बार साफ‑सुथरी दिवाली चाहते हैं तो छोटे बदलाव बहुत फर्क ला सकते हैं।
त्योहार के दिन और उसके बाद PM2.5 और PM10 के स्तर में तेज़ी से वृद्धि होती है। ये सूक्ष्म कण फेफड़ों और दिल पर असर करते हैं, बच्चों, बुज़ुर्गों और फेफड़ों या दिल की बीमारी वाले लोगों को ज़्यादा खतरा रहता है। खांसी, सांस में तकलीफ, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी शिकायतें आम हो जाती हैं।
बाहर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) चेक करके आप समझ सकते हैं कि कब बाहर निकलना सुरक्षित है। अगर AQI खराब हो तब बेवजह बाहर न जाएँ और मास्क का इस्तेमाल करें।
पहला कदम: पटाखों की जगह रोशनी पर ध्यान दें। LED लाइट्स, लालटेन और ध्वनि‑मुक्त लाइट शो से उत्सव बन जाता है और हवा साफ रहती है।
दूसरा: अगर पटाखे जलाने की सोच रहे हैं तो कम प्रदूषण वाले या ग्रीन पटाखे चुने और समय कम रखें। ज़रूरी नहीं कि हर घर पटाखे जलाए — सामुदायिक कार्यक्रम में हिस्सा लें, वहां समय और मात्रा नियंत्रित रहती है।
तीसरा: कचरा जलाना बंद करें। पत्तियाँ, प्लास्टिक या मीनिंगलेस चीज़ें जलाने से जहरीली गैसें निकलती हैं। दिवाली के बाद सफाई करते समय वे चीज़ें सुरक्षित तरीके से रिसाइकिल या डिस्पोज़ करें।
चौथा: घर के अंदर हवा साफ रखें। अगर बाहर धुँआ अधिक है तो खिड़की और दरवाज़े बंद रखें, एयर प्यूरीफायर या हाई‑एएफटी फैन इस्तेमाल करें। स्टोव और मोमबत्तियाँ भी कम रखें क्योंकि अंदर भी छोटे कण बनते हैं।
पांचवा: ऑटो और वाहन कम चलाएँ। त्योहार पर घरों में मेहमान आते‑जाते हैं, पर यात्रा साझा करें या पब्लिक ट्रांसपोर्ट लें। इससे सड़क पर धुआँ और भी कम होगा।
छठा: बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए खास ध्यान रखें। बाहर जाने पर N95/KN95 मास्क उपयोगी हैं; हफ्तेभर तक एक्सरसाइज और लंबी दौड़ कम रखें अगर एयर क्वालिटी खराब हो।
सातवाँ: सजावट के वैकल्पिक तरीक़े अपनाएँ — इको‑रैम्बो, मिट्टी के दीये, और फूलों से सजावट से पारंपरिक माहौल भी बना रहता है और प्रदूषण नहीं बढ़ता।
छोटे बदलाव और थोड़ी सी planning से आप और आपका परिवार सुरक्षित रह सकता है और शहर की हवा भी साफ़ रहेगी। इस दिवाली पर ख़ुशी और सेहत — दोनों साथ रखें।
दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में दिवाली के बाद खतरनाक धुंध की चादर फैल गई है। इससे वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो चुकी है। दिल्ली के प्रमुख क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बेहद खराब स्तर पर पहुंच चुका है। पाबंदियों के बावजूद कई लोगों ने पटाखे जलाए, जिससे धुंध और प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो गई है।