टोल प्रणाली: FASTag से लेकर टोल चार्ज तक आसान समझ

टोल प्रणाली का सीधा मतलब है: सड़क उपयोग के बदले फीस। राष्ट्रीय राजमार्गों और कुछ राज्य सड़कों पर टोल प्लाजा लगते हैं, जहां वाहन टैक्स या टोल भरता है। अब ज्यादातर जगह फायदे के लिए FASTag और इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का इस्तेमाल होता है—जो समय बचाता है और ट्रैफिक कम करता है।

क्या FASTag कैसे काम करता है? FASTag एक RFID चिप वाला स्टिकर होता है जो आपकी गाड़ी के विंडस्क्रीन पर चिपकता है। टोल प्लाजा पर लगे रीडर यह चिप पढ़ते हैं और आपका बैलेंस बैंक खाते या वॉलेट से कट जाता है। भुगतान सफल होते ही SMS और डिजिटल रसीद मिल जाती है। आसान, तेज और कागजी रसीद कम होती है।

टोल चार्ज कैसे तय होते हैं और किस बात का ध्यान रखें

टोल दरें कई चीज़ों पर निर्भर करती हैं: मार्ग की लंबाई, वाहन का प्रकार (कार, ट्रक, बस), और कभी-कभी समय (कुछ विशेष परियोजनाओं में) या कांट्रैक्ट शर्तें। निजी कंपनी चलाती है तो वह निर्णयनुसार एन्नुइटी या दूरी-आधारित चार्ज लेती है। यात्रा से पहले अपने रूट का अनुमान लगाकर टोल की कुल रकम जानना अच्छा रहता है—NHAI और राज्य टोल पोर्टल पर रेट सूची मिल जाती है।

यात्रियों के लिए प्रैक्टिकल टिप्स: FASTag में पर्याप्त बैलेंस रखें, बैंक या पोर्टल पर रेकॉर्ड चेक करें, और रसीदों को मोबाइल से सेव कर लें। टोल प्लाजा पर रुकते समय लेन सही चुनें—FASTag लेन में ही जाएं। निजी वाहनों के अलावा कुछ विशेष वाहनों को छूट मिलती है; राज्य नीति देखें।

समस्याएं और शिकायतें—क्या करें जब भुगतान गलत कटे

अगर FASTag का पेमेंट डबल कट गया या गलत राशि ली गई तो तुरन्त अपने FASTag जारी करने वाले बैंक/वॉलेट पर शिकायत दर्ज करें। NHAI की वेबसाइट या टोल कस्टमर केयर नंबर से भी मदद मिलती है। ट्रांजैक्शन ID, तारीख और मोबाइल नंबर संभाल कर रखें—ये जल्दी रिजॉल्व करने में काम आते हैं।

आगे क्या बदलेगा? भारत में धीरे-धीरे फ्री-फ्लो टोलिंग (बिना रुकावट) और GPS-आधारित बिलिंग पर काम चल रहा है। इससे टोल पेड सिस्टम और भी तेज़ और स्मार्ट होगा। साथ ही डिजिटल पारदर्शिता से गलत कटौती और लंबी लाइनें कम होंगी।

सार आपने क्या करना है: FASTag लगवाएं, बैलेंस में रखें, रसीद चेक करें और किसी गड़बड़ी पर तुरंत बैंक/NHAI से संपर्क करें। सही तैयारी से सड़क यात्रा तेज और तनावमुक्त बनती है।

भारत में टोल प्लाजाओं की जगह लेगी सैटेलाइट आधारित टोल वसूली प्रणाली
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भारत में टोल प्लाजाओं की जगह लेगी सैटेलाइट आधारित टोल वसूली प्रणाली

भारतीय सरकार ने देश में पारंपरिक टोल बूथों की जगह सैटेलाइट-आधारित टोल वसूली प्रणाली लाने की योजना बनाई है। इस नई प्रणाली को लागू करने की घोषणा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की। इस योजना के तहत वाहनों की यात्रा दूरी के अनुसार टोल राशि स्वचालित रूप से बैंक खाते से कट जाएगी। यह प्रणाली मौजूदा FASTag प्रणाली के साथ काम करेगी और टोल प्रणाली को सुधारने की दिशा में अहम कदम साबित होगी।

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