चत्रपति संभाजी महाराज — साहस और संघर्ष की कहानी

क्या आप जानते हैं कि संभाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य को मुश्किल दौर में संभाला और मुघलों के सामने जी-तोड़ प्रतिरोध किया? अगर आप मराठा इतिहास में रुचि रखते हैं तो उनके फैसले, लड़ाइयाँ और बलिदान सीधे आधुनिक महाराष्ट्र की पहचान से जुड़े हैं।

संक्षिप्त जीवन परिचय

संभाजी महाराज का जन्म 1657 में हुआ था और वे छत्रपति शिवाजी महाराज के बड़े पुत्र थे। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने 1681 के आसपास शासन संभाला। उनके शासनकाल में मराठा रियासत को मजबूती देने के साथ ही मुघल आक्रमणों का सामना करना पड़ा। संभाजी ने अपनी सेना के साथ कई दुश्मनों का मुकाबला किया और राज्य की सुरक्षा के लिए कठिन फैसले लिए।

उनकी नेतृत्व क्षमता और निर्भीकता ने मराठों को भीतर से एकजुट रखा। हालांकि 1689 में उन्हें मुघल सेनाओं ने पकड़ लिया और उनका बलिदान हुआ। यह घटना मराठा इतिहास का एक दुखभरा और प्रेरणादायक अध्याय बन गई। संभाजी की शहादत ने बाद के वर्षों में मराठा संघर्ष को नई ऊर्जा दी।

यादगार स्थल, जयंती और विरासत

आज संभाजी महाराज को महाराष्ट्र और देश के कई हिस्सों में श्रद्धा से याद किया जाता है। संभाजी जयंती हर साल मनाई जाती है, जहां उनकी बहादुरी और योगदान की चर्चा होती है। इतिहास में उनकी भूमिका पढ़ने के लिए कई स्थान दर्शनीय हैं:

- तुलापुर: माना जाता है कि यहीं उनकी अंतिम लड़ाई और शहादत हुई थी; कई लोग श्रद्धांजलि देने आते हैं।

- रायगड व अन्य किले: मराठा दुर्गों पर घूमते समय आप उस समय की रणनीति और जीवनशैली के निशान देख सकते हैं।

संभाजी महाराज का असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहा। उनके साहस और आत्म-बलिदान की कहानियाँ साहित्य, नाटकों और स्थानीय लोककथाओं में आज भी गूँजती हैं। स्कूलों और कॉलेजों में उनकी जीवनी पढ़ाई जाती है और कई स्थानीय कार्यक्रम उनकी याद में आयोजित होते हैं।

अगर आप इतिहास प्रेमी हैं और संभाजी महाराज के बारे में और जानना चाहते हैं तो यह सलाह रहेगी: पहले विश्वसनीय इतिहासकारों की किताबें पढ़ें, किले और संग्रहालय देखें, और लोककथाओं के साथ तथ्यों को अलग करके समझें। असल घटनाओं और बाद में जो जोड़-तोड़ हुई है, उसे पहचानना जरूरी है।

संक्षेप में, चत्रपति संभाजी महाराज न केवल एक योद्धा थे बल्कि मराठा समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत भी रहे। उनके निर्णय, संघर्ष और अंतिम बलिदान ने इतिहास को आकार दिया और आज भी कई लोगों के लिए प्रेरक बने हुए हैं।

विक्की कौशल की फिल्म 'छावा' ने दूसरे शनिवार को ₹44 करोड़ की कमाई की, ₹400 करोड़ के करीब पहुंची
मनोरंजन

विक्की कौशल की फिल्म 'छावा' ने दूसरे शनिवार को ₹44 करोड़ की कमाई की, ₹400 करोड़ के करीब पहुंची

विक्की कौशल और रश्मिका मंदाना की फिल्म 'छावा' ने नौवे दिन ₹44 करोड़ का कलेक्शन किया, जो पिछले दिन से 87% ज़्यादा है। भारत में इसकी कुल कमाई ₹286.75 करोड़ हो चुकी है और यह दुनिया भर में ₹393.35 करोड़ तक पहुंच चुकी है। लक्ष्मण उतेकर के निर्देशन में बनी यह फिल्म विक्की की पहली ₹300 करोड़ की हिट हो सकती है।

और देखें