ब्लॉक डील सुनते ही लगता है कि बाजार में बड़ी हलचल हुई है। असल में ब्लॉक डील वह ट्रेड होती है जिसमें बड़ी मात्रा में शेयर्स एक ही बार में किसी संस्थागत खरीदार या विक्रेता के बीच निपटाए जाते हैं। ये आम ट्रेडिंग से अलग दिखती हैं क्योंकि इनका उद्देश्य टीक-टिक करके छोटे-छोटे ऑर्डर डालना नहीं, बल्कि बड़ी पोजीशन एक बार में स्थानांतरित करना होता है।
ब्लॉक डील एक्सचेंज की एक खास व्यवस्था के जरिए होती है। संस्थागत निवेशक, म्यूचुअल फंड, पीएफ और बड़ा प्रमोटर जब बड़ी मात्रा में शेयर खरीदना या बेचना चाहते हैं, तो वे ब्लॉक डील विंडो का इस्तेमाल करते हैं। इसमें कीमत अक्सर खरीदार और विक्रेता के बीच निहित (negotiated) होती है और निपटान एक्सचेंज नियमों के तहत हो जाता है।
एक बात ध्यान रखें: ब्लॉक डील का होना मतलब ये नहीं कि कंपनी का फंडामेंटल बदल गया है। कभी-कभी यह सिर्फ पोर्टफोलियो रि-बैलेंसिंग, प्रमोटर हिस्सेदारी में कटौती या किसी बड़े निवेशक का एंट्री/एक्जिट होता है।
तो अब सवाल आता है — आप एक छोटे निवेशक के तौर पर ब्लॉक डील को कैसे देखें? सबसे आसान तरीके ये हैं:
नियमन की बातें भी जान लें: ब्लॉक डील पर एक्सचेंज और रेगुलेटर निगरानी रखते हैं, ताकि मार्केट मैनिपुलेशन रोका जा सके। रिपोर्टिंग और खुलासे के नियम होते हैं, इसलिए बड़ी डील्स आमतौर पर पब्लिक रिकॉर्ड में दिखाई देती हैं।
अंत में, ब्लॉक डील एक इंटरेक्टिव इंडिकेटर है — कभी यह अवसर दिखाता है, तो कभी चेतावनी भी दे सकता है। आप इसे एक संकेत के रूप में लें, ना कि अकेले निवेश निर्णय के तौर पर। अगर किसी ब्लॉक डील ने आपकी निगाह पकड़ी है, तो कंपनी के ताज़ा फाइनैंसल, न्यूज और अन्य बड़े निवेशकों के मूव्स भी चेक कीजिए।
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3 जून 2025 को शेयर बाजार में YES Bank, Zinka Logistics, Aptus Value Housing Finance और Ola Electric में लगभग 5500 करोड़ रुपये के बड़े ब्लॉक डील्स हुए। इन सौदों में Zinka Logistics में 9% हिस्सेदारी की बिक्री, Aptus में 7.44% इक्विटी का सौदा और YES Bank में SBI द्वारा 13.19% हिस्सेदारी की संभावित बिक्री जैसे प्रमुख लेनदेन शामिल थे।