अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव: क्या होता है और क्यों देखें?

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव हर चार साल में दुनिया की सबसे देखी जाने वाली राजनीतिक प्रक्रिया होती है। क्या आप जानना चाहते हैं कि यह सिर्फ वोट देने का दिन नहीं है? सही—अमेरिकी चुनाव में प्राइमरी, पार्टी कन्वेंशन, जनमत संग्रह और फिर इलेक्टोरल कॉलेज जैसे कई चरण होते हैं, जो मिलकर अंतिम नतीजा तय करते हैं।

अमेरिकी चुनाव कैसे होते हैं: आसान भाषा में

सबसे पहले पार्टी के अंदर उम्मीदवार चुनने के लिए प्राइमरी और कॉकसस होते हैं (आमतौर पर जनवरी से जून तक)। यह वोटरों और डेलीगेट्स की प्रक्रिया है जिससे हर पार्टी अपनी राष्ट्रपति उम्मीदवार तय करती है। फिर गर्मियों में दोनों बड़े दल—डेमोक्रेट व रिपब्लिकन—अपने राष्ट्रीय सम्मेलन में आधिकारिक उम्मीदवार घोषित करते हैं।

अगला बड़ा दिन सामान्य चुनाव (General Election) होता है, जो नवंबर के पहले सप्ताह में शामता है। नागरिक सीधे राष्ट्रपति को वोट नहीं देते—वोटर राज्यों में वोट डालते हैं और हर राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य (electors) चुने जाते हैं। कुल 538 इलेक्टोरल वोट होते हैं; 270 या उससे ज्यादा मिलने पर कोई उम्मीदवार विजयी कहलाता है।

कहीं-कहीं मेल-इन बैलेट, प्री-वैटिंग या देर से मतगणना के कारण परिणाम घोषित होने में टाइम लग सकता है। इसलिए कई बार मीडिया सुबह-शाम तेजी से कॉल कर देती है, पर आधिकारिक तौर पर राज्य के दर्ज किए हुए परिणाम मायने रखते हैं।

किस बात पर नजर रखें और भारत के लिए क्या मायने है

अगर आप इंडिया से चुनाव देख रहे हैं तो ये चीजें ध्यान में रखें: डेबेट्स, पोलिंग और स्विंग स्टेट्स जैसे फ्लोरिडा, पेंसिल्वेनिया, ओहियो निर्णायक होते हैं। चुनावी रणनीतियाँ—आर्थिक नीति, विदेश नीति, टेक्नोलॉजी तथा व्यापार—भारत पर असर डाल सकती हैं। उदाहरण के लिए व्यापार समझौते, वीज़ा नीतियां और रक्षा सहयोग सीधे प्रभावित होते हैं।

नतीजे आने के बाद तुरन्त नए व्यापार संकेत, स्टॉक मार्केट की हलचल और डॉलर-रुपये की दर बदल सकती है। इसलिए व्यवसाय, आईटी और शिक्षा से जुड़े लोग इन संकेतों पर तुरंत नजर रखते हैं।

इन्हें कैसे फॉलो करें? रियल टाइम के लिए विश्वसनीय इंटरनेशनल न्यूज़ चैनल, अमेरिका के आधिकारिक वेबसाइट (FEC, state election sites), और ट्विटर/X पर जानी-मानी राजनीतिक पत्रकारों की रिपोर्ट देखें। इंडिया के बड़े मीडिया आउटलेट्स भी तेज और समझने लायक कवरेज देते हैं।

अमूमन चुनाव के बाद कानूनी चुनौतियाँ, पुनर्विचार या काउंटी-स्तर पर मतगणना के मुद्दे आ सकते हैं। इसलिए एक दिन में स्थिति स्पष्ट न हो तो घबराएँ नहीं। अंतिम फैसला इलेक्टोरल कॉलेज के वोट और कांग्रेस में प्रमाणन से होता है—इंऑफिशियल कॉल्स केवल शुरुआती संकेत होते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव सिर्फ अमेरिका का मामला नहीं है—यह वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के ढांचे को प्रभावित करता है। अगर आप रोज़ाना खबर देखते हैं तो चुनाव के हर चरण को समझना आसान हो जाएगा और आप बेहतर अनुमान लगा पाएँगे कि परिणाम का आपके काम, पैसे और सुरक्षा पर क्या असर होगा।

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