गिरफ्तारी: आपके अधिकार और तुरंत करने योग्य कदम

किसी को पुलिस द्वारा हिरासत में लेना यानी गिरफ्तारी। यह सुनने में आसान है लेकिन वास्तविक स्थिति में डर और उलझन जल्दी बन जाती है। इसलिए समझना जरूरी है कि कानून में क्या हक हैं और तुरंत क्या करना चाहिए। नीचे सरल भाषा में बुनियादी बातें दी गई हैं जो फायदेमंद और व्यावहारिक हैं।

गिरफ्तारी के कानूनी अधिकार

आपके कुछ बुनियादी अधिकार कानून और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों से सुरक्षित हैं:

  • आपको गिरफ्तारी के कारण बताने का अधिकार मिलता है। पुलिस बताती है कि आप पर क्या आरोप हैं।
  • आपको वकील से मिलने का अधिकार है। कानूनी सलाह लेने से पहले कोई स्वीकारोक्ति न दें।
  • किसी भी तरह की जबरन आत्म-प्रकटन (self-incrimination) देना जरूरी नहीं है—आर्टिकल 20(3) के तहत आप इसकी मंशा कर सकते हैं।
  • पुलिस को आपको 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है (आर्टिकल 22(2) और CrPC के नियम)।
  • डी.के. बासु निर्देशों के तहत पुलिस को गिरफ्तार करते समय रिकॉर्ड बनाना, गवाहों के सामने गिरफ्तारी मेमो करवाना और मेडिकल जांच की सुविधा देना चाहिए।

कदम-ब-कदम: अगर आप या आपके जानने वाले को गिरफ्तार किया जाए

ठंडा दिमाग रखें। झटपट निर्णय गलत साबित हो सकते हैं। नीचे आसान, काम करने योग्य कदम हैं:

  • पहला काम: वकील का नंबर बोलें और परिवार को सूचित करें। यदि फोन नहीं दिया जा रहा, तो नोट कर लें किसने और कब रोका।
  • पुलिस से स्पष्ट पूछें कि किस धाराओं में गिरफ्तार कर रहे हैं और गिरफ्तारी मेमो मांगें—इसके गवाहों के परिणाम पर जोर दें।
  • चोट या शारीरिक दुरुपयोग दिखने पर तुरन्त मेडिकल जांच कराएं और उसका रिर्पोट सुरक्षित रखें।
  • किसी भी साक्ष्य के बिना पूछताछ में समीकरण न दें—Section 161 के तहत बयान दे रहे हों तो वकील की सलाह लें।
  • यदि मामला बाइलबल है, तो जमानत के अधिकार के बारे में पूछें; गैर-बाइलबल में वकील तुरंत जमानत याचिका दायर करेगा।
  • अन्यथा, अगर हिरासत गलत या गुमराह कर रखी जा रही है, तो हबियस कॉर्पस या उच्च न्यायालय में रिलीफ़ की मांग की जा सकती है।

ये बुनियादी बातें अक्सर मदद करती हैं कि गिरफ्तारी के समय आप खुद की सुरक्षा और कानूनी स्थिति को बेहतर रख सकें। हर केस अलग होता है—इसलिए सबसे भरोसेमंद उपाय है: शांत रहें और वकील से तुरंत संपर्क करें। अगर आपको लगता है कि अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, तो परिवार या वकील के साथ मिलकर डी.के. बासु निर्देशों और स्थानीय कानूनी प्रक्रिया का पालन कराते हुए अगला कदम उठाएं।

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