क्या आपने कभी सोचा है कि जब सरकार स्वास्थ्य पर इतिहास में सबसे ज्यादा पैसा खर्च कर रही है, तो फिर भी कुछ जरूरी चीजें छूटी जा रही हैं? निरमला सीतारमण, वित्त मंत्री ने हाल ही में प्रस्तुत किए गए भारतीय यूनियन बजट 2026-27नई दिल्ली में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड 1,04,599 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह पहली बार है जब स्वास्थ्य बजट 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करता हुआ दिखाया गया है।
लेकिन यहीं पर कहानी में एक मोड़ आता है। विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस विशाल राशि के बावजूद, देश की सांस लेने वाली समस्याओं—खासकर फेफड़ों की सेहत (Lung Health)—को लगभग पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। जबकि कैंसर, मानसिक स्वास्थ्य और आयुष के लिए खास प्रावधान हैं, फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए कोई 'राष्ट्रीय फेफड़ों की स्वास्थ्य मिशन' नहीं है।
बजट में क्या बदलाव आए?
आइए पहले सकारात्मक पहलुओं को समझते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य मंत्रालय को 98,311 करोड़ रुपये मिले थे। अब यह राशि बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपये हो गई है। अगर हम पिछले दशक को देखें, तो 2015 में यह बजट महज 34,286 करोड़ रुपये था। यह अंकों की भाषा में लगभग 191 प्रतिशत की वृद्धि है।
बजट का मुख्य संदेश स्पष्ट है: स्वास्थ्य अब सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि एक निवेश है। सरकार ने कई दिशाओं में ध्यान दिया:
- जिला स्तर पर सुविधाएं: जिला अस्पतालों में आपातकालीन और ट्राउमा केयर सेंटर (Emergency and Trauma Care Centers) की स्थापना होगी। इनकी क्षमता में 50 प्रतिशत की वृद्धि की योजना है ताकि महत्वपूर्ण मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और वे बड़े शहरों पर निर्भर न रहें।
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए देखभाल: भारत की तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी को देखते हुए, जीरेट्रिक केयर (Geriatric Care) प्रणालियों को मजबूत करने के लिए संसाधन आवंटित किए गए हैं।
- दवाओं की सुलभता: मधुमेह (Diabetes) और कैंसर की दवाओं को आम जनता के लिए सुलभ बनाने के लिए फार्मास्युटिकल क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये का निवेश घोषित किया गया है।
- बायोफार्मास्युटिकल स्ट्रेंथ: इसे एक ज्ञान, तकनीक और नवाचार-संचालित रणनीति के रूप में परिभाषित किया गया है जो स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने और दवा निर्माण को समर्थित करने का लक्ष्य रखती है।
फेफड़ों की सेहत क्यों पीछे रह गई?
यहाँ वह मुद्दा है जिस पर चर्चा होनी चाहिए थी। भारत में एस्थमा (Asthma), COPD (Chronic Obstructive Pulmonary Disease), तबखीलियां (TB) से जुड़ी जटिलताओं और प्रदूषण से जुड़ी श्वसन रोगों से लाखों लोग पीड़ित हैं। फिर भी, बजट में फेफड़ों की सेहत के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि यदि फेफड़ों की सेहत को गंभीरता से लिया जाता, तो बजट में ये बातें शामिल होतीं:
- स्पष्ट लक्ष्यों के साथ एक राष्ट्रीय फेफड़ों की स्वास्थ्य मिशन की स्थापना।
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) पर सभी के लिए श्वसन स्क्रीनिंग सुविधाएं।
- फेफड़ों के पुनर्वास सेवाओं का विस्तार।
- घर पर ऑक्सीजन थेरेपी और देखभाल को किफायती बनाने के उपाय।
- श्वसन थेrapeutists (Respiratory Therapists) की प्रशिक्षण और नियुक्ति।
- हवा के प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं को स्वास्थ्य नीति ढांचे से जोड़ना।
विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि क्या बजटीय चर्चाओं में फेफड़ों की सेहत की जरूरतों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व हुआ? उनकी राय में, फेफड़ों की सेहत की जिम्मेदारी अभी भी अलग-अलग सरकारी विभागों में बिखरी हुई है, जिससे एक समन्वित दृष्टिकोण की कमी है।
प्रभाव और विशेषज्ञों का विश्लेषण
बजट का यह पहलू यह दर्शाता है कि सरकार स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के विकास पर कैसे काम कर रही है। हालांकि, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का तर्क है कि श्वसन स्वास्थ्य जैसे कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अधिक स्पष्ट ध्यान और समर्पित मिशन-स्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
YouTube रिपोर्टिंग और अन्य स्रोतों के अनुसार, कुल आवंटन बढ़ने के बावजूद, मोदी सरकार ने कुछ श्रेणियों में स्वास्थ्य क्षेत्र के खर्च में 6,701 करोड़ रुपये की कमी की है। यह जटिल बजटीय समायोजनों को दर्शाता है। बजट 2026-27 व्यापक स्वभाव का है, जो आपातकालीन देखभाल, विशेष जीरेट्रिक सेवाओं, दवा सुलभता, शोध पहलुओं और आयुष जैसे पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। लेकिन क्षेत्र-विशिष्ट विश्लेषण बताते हैं कि बीमारियों के श्रेणियों में कवर करने में असमानता है।
अगला क्या होगा?
अगले कुछ महीनों में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य सरकारें या स्वैच्छिक संगठन इस खाली स्थान को भर पाते हैं। विशेषज्ञों की अपेक्षा है कि जल्द ही श्वसन स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा, खासकर क्योंकि वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार चिंता का विषय बना हुआ है।
Frequently Asked Questions
स्वास्थ्य बजट में फेफड़ों की सेहत के लिए क्यों कोई विशेष प्रावधान नहीं है?
विशेषज्ञों का मानना है कि फेफड़ों की सेहत की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों में बिखरी हुई है, जिससे एक समर्पित राष्ट्रीय मिशन की कमी महसूस हो रही है। इसके कारण एस्थमा, COPD और प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के लिए प्राथमिक स्तर पर पर्याप्त स्क्रीनिंग और उपचार सुविधाएं अनुपलब्ध हैं।
बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल कितनी राशि आवंटित की गई है?
इस बार स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 1,04,599 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है और पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करता है।
जिला अस्पतालों में क्या नई सुविधाएं शुरू होंगी?
बजट में जिला अस्पतालों में आपातकालीन और ट्राउमा केयर सेंटर की स्थापना शामिल है, जिनकी क्षमता में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। इससे महत्वपूर्ण मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार मिलने की उम्मीद है।
दवाओं की सुलभता के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
मधुमेह और कैंसर की दवाओं को आम जनता के लिए किफायती बनाने के लिए फार्मास्युटिकल क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसके अलावा, बायोफार्मास्युटिकल स्ट्रेंथ पहल के माध्यम से आधुनिक दवा निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।