बिहार में मत्स्य-पशुपालन से रुकेगा पलायन: नंदकिशोर राम का दावा

बिहार में मत्स्य-पशुपालन से रुकेगा पलायन: नंदकिशोर राम का दावा

क्या बिहार की जमीन अब अपने बेटों को बाहर भेजने के बजाय उन्हें रोजगार दे पाएगी? नंदकिशोर राम, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री of बिहार सरकार ने इस सवाल का एक ठोस जवाब दिया है। उनका कहना है कि मछली पालन और पशुपालन को बढ़ावा देने से राज्य से होने वाला श्रमिक पलायन रोका जा सकता है। यह घोषणा उन्होंने 16 जून 2026 को समग्र मात्स्यिकी विकास सम्मेलनमीठापुर स्थित मत्स्य विकास भवन में की थी।

बात सिर्फ़ बयानबाजी तक सीमित नहीं है। आँकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का कुल मछली उत्पादन बढ़कर 10,28,000 टन हो गया है। यानी दस लाख अट्ठारह हजार टन मछली अब बिहार की तालाबों और नदियों से निकल रही है। मंत्री राम का मानना है कि अगर इस गति को बनाए रखा जाए और पशुपालन क्षेत्र को भी समान महत्व दिया जाए, तो बेरोजगारी कम होगी और युवाओं को घर के पास ही काम मिलेगा।

अंकों में बिहार की प्रगति

मंत्री राम ने सम्मेलन में कुछ ऐसे आँकड़े पेश किए जो सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को दर्शाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में 7,990 हेक्टेयर नए जल क्षेत्र विकसित किए गए हैं। ये वे क्षेत्र हैं जहाँ पहले मछली पालन संभव नहीं था, लेकिन अब वहाँ नियंत्रित जल संसाधन उपलब्ध हैं।

इसी तरह, 2,721 हेक्टेयर 'चौर' भूमि (जहाँ मौसमी जलभराव होता है) में आधुनिक तालाबों का निर्माण किया गया है। पानी की कमी को दूर करने के लिए 5,264 नए ट्यूबवेल लगाए गए हैं। इन सबके साथ, राज्य में 233 मत्स्य बीज हाचरियाँ स्थापित की गई हैं, जो राज्य की कुल बीज आवश्यकता का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पूरा करती हैं। बाकी 30 प्रतिशत की आपूर्ति अन्य स्रोतों से होती है।

विपणन और बिजली दरों में बदलाव

उत्पादन बढ़ाना आधा खेल है, उसे बेचना दूसरा आधा। इसके लिए मंत्री राम ने 'मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना' का उल्लेख किया। इस योजना के तहत नए मत्स्य बाजार (मार्केट यार्ड) बन रहे हैं ताकि किसानों को मध्यस्थों के चंगुल से मुक्ति मिले और उन्हें सीधे लाभ पहुँचे।

लेकिन सबसे बड़ी खुशखबरी बिजली दरों से जुड़ी है। हाल ही में जारी एक वीडियो संदेश में मंत्री राम ने घोषणा की कि किसानों और मछली पालकों के लिए अलग बिजली दरें लागू होंगी। खेतों में पानी भरने और मछली पालन के लिए बिजली की खपत पर विशेष सब्सिडी दी जाएगी। इससे मछली पालन एक लाभदायक व्यवसाय बन सकता है, न कि सिर्फ़ एक आय का साधन।

राष्ट्रीय नीतियों का समर्थन

बिहार की यह पहल केंद्र सरकार की नीतियों के अनुरूप है। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पशुपालन, डेयरी और मत्स्य के लिए अलग मंत्रालय बनाया था। केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने भेड़ और बकरी पालन को 'गरībों का एटीएम' कहा है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत भेड़ नस्ल सुधार कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) के अंतर्गत 500 भेड़ या बकरी क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स के लिए 50 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी दी जा रही है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹50 लाख प्रति प्रोजेक्ट है। पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) के तहत कचरे से धन (waste-to-wealth) परियोजनाओं और वैक्सीन उत्पादन इकाइयों के लिए 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जा रही है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और सामाजिक संदर्भ

राजनीतिक पृष्ठभूमि और सामाजिक संदर्भ

नंदकिशोर राम पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक हैं, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वे स्वयं को दलित समुदाय का प्रतिनिधि बताते हैं और अपनी सेवाओं को राज्य के विकास के लिए समर्पित देखते हैं। मार्च 2026 में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर आरोप लगाया था कि वे सरकारी आवास खाली करने से इसलिए इनकार कर रही हैं क्योंकि वे दलित समुदाय से हैं। हालाँकि, उनकी वर्तमान नीतियाँ विकास और रोजगार पर केंद्रित हैं।

Frequently Asked Questions

बिहार में मछली उत्पादन में कितनी वृद्धि हुई है?

वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का कुल मछली उत्पादन 10,28,000 टन तक पहुँच गया है। यह वृद्धि नए जल क्षेत्रों के विकास और 233 मत्स्य बीज हाचरियों के स्थापित होने के कारण हुई है, जो राज्य की 70 प्रतिशत बीज आवश्यकता पूरी करती हैं।

मछली पालकों के लिए बिजली दरों में क्या बदलाव आएगा?

मंत्री नंदकिशोर राम ने घोषणा की है कि मछली पालकों और किसानों के लिए अलग बिजली दरें लागू होंगी। खेतों में पानी भरने और मछली पालन के लिए बिजली की खपत पर विशेष सब्सिडी दी जाएगी, जिससे यह व्यवसाय अधिक लाभदायक बनेगा।

पशुपालन के लिए केंद्र सरकार की क्या सब्सिडी उपलब्ध है?

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत 500 भेड़ या बकरी क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स के लिए 50 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी दी जा रही है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹50 लाख प्रति प्रोजेक्ट है। इसके अलावा, AHIDF के तहत अवसंरचना विकास के लिए 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना का उद्देश्य क्या है?

इस योजना के तहत नए मत्स्य बाजार (मार्केट यार्ड) बन रहे हैं ताकि किसानों को मध्यस्थों के चंगुल से मुक्ति मिले और उन्हें सीधे लाभ पहुँचे। इससे मत्स्य उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा और किसानों की आय बढ़ेगी।

क्या मत्स्य बीज की पूर्ण आपूर्ति राज्य में हो रही है?

हाल ही में स्थापित 233 मत्स्य बीज हाचरियाँ राज्य की कुल बीज आवश्यकता का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पूरा करती हैं। शेष 30 प्रतिशत की आवश्यकता अन्य स्रोतों से पूरी की जाती है, लेकिन सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में यह आत्मनिर्भरता बढ़े।